Mere bhee kaee khwaab the, akl thi, javaab the

Mere bhee kaee khwaab the, akl thi, javaab the, , poem for dreams come true lovesove

मेरे भी कई ख्वाब थे
अक्ल थी,जवाब थे
जिंदगी से आस थी !
उमंग था उन्नति का,
कुचल गया जो घात से !!

परिस्थिति का दास हूँ ,
याकि जिंदा लाश हूँ !
सवाल है समाज से,
मौन थे जो रह गए !!
~Harsh Nath Jha