Zindagi ke din Maa tere bin

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‘ज़िंदगी’ के दिन , “मां” अब तेरे बिन (होस्टल लाइफ )
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“नींद” बहुत आती है, पढ़ते-पढ़ते हमे।
मां तू होती तो कह देते कि एक कप चाय बना दे।।
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थक गए हैं मेस क़ी सुखी रोटी खा-खा के।
मां तू होती तो कह देते आलू पराठे बना दे ।।
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बंध गए हैं इन रूम की चार दिवारी में।
मां तू होती तो कहती ज़रा बाहर घूम ले।।
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वही कोशिश रोज खुश रहने/दिखने की।
मां तू होती तो हौले से मुस्कुरा लेते ।।
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मां परेशानिया तो बहुत-बहुत है यहाँ ।
मां तुझे बताते तो, तुझे भी रुला देते ।।
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बहुत दूर निकल आए हैं घर से ए मां।
मां तेरे सपनो की परवाह ना होती, तो कबके घर चले आते।।
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आये हैं घर से दूर, सिर्फ यही सोच कर कि।
इन परेशानियों के बाद तुझे दुनिया की हर ख़ुशी दिला दें।