Aayi thi woh aise ki dil mai sama kar chali gayi

आई थी वो ऐसे कि, दिल में समा कर चली गई,
सो रहा था चैन से मैं, कि वो जगा कर चली गई …
बिल्कुल न ठहरी वो इक पल भी मेरे गरीबखाने पर,
दिखा के बस झलक अपनी, जी दुखा कर चली गई …

न आया समझ कि ये हक़ीक़त है या सपना,
मन में अजीब सी, हलचल मचा कर चली गई …
आई थी कुछ कहने, पर ना कह सकी शायद,
बस दिल की बातें, दिल में छुपा कर चली गई …

उससे मिलने से पहले भी तो, मैं बड़ा कन्फ्यूज था,
वो बेमतलब ही ढेर सारी, उलझनें बढ़ा कर चली गई॥