माँ, भले ही पढ़ी-लिखी हो या नहीं

माँ, भले ही पढ़ी-लिखी हो या नहीं,
पर संसार का दुर्लभ व महत्वपूर्ण ज्ञान
हमें माँ से ही प्राप्त होता है।