Category: Touching Stories, Motivational stories in hindi

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Ek Vyakti ne apne Guru se pucha

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एक व्यक्ति ने अपने गुरु से पूछा-
मेरे कर्मचारी मेरे प्रति ईमानदार नहीं है, मेरी पत्नी मेरे बच्चे और सभी दुनिया के लोग सेल्फिश हैं,
कोई भी सही नहीं हैं.
गुरु थोडा मुस्कुराये और उसे एक स्टोरी सुनाई..
एक गाँव में एक अलग सा कमरा था जिसमे 1000 शीशे लगे थे. एक छोटी लड़की उस कमरे में गई और खेलने लगी.
उसने देखा 1000 बच्चे उसके साथ खेल रहे है और वो इंजॉय करने लगी, जेसे ही वो अपने हाथ से ताली बजाती सभी बच्चे उसके साथ ताली बजाते
उसने सोचा यह दुनिया की सबसे अच्छी जगह है यहां वह् सबसे ज्यादा खुश रहती है वो यहां बार बार आना चाहेगी.
इसी जगह पर एक उदास आदमी ने विजिट की..
उसने अपने चारो तरफ हजारो दुखी और रोष से भरे चेहरे देखे वह बहुत दुखी हुवा और उसने हाथ उठा कर सभी को धक्का लगाना चाहा.. उसने देखा हजारों हाथ उसे धक्का मार रहे है..उसने कहा यह दुनिया की सबसे खराब जगह है वह् यहां दुबारा नहीं आना चाहता और उसने वो जगह छोड़ दी.
इसी तरह यह दुनिया एक कमरा है जिसमे हजारों मिरर यानी शीशे लगे है,
जो कुछ भी हमारे अंदर भरा होता है वही यह सोसाइटी हमे लोटा देती है.
अपने मन और दिल को बच्चों की तरह साफ़ रखें तब यह दुनिया आपके लिए स्वर्ग की तरह ही है….!

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Bhakt Aur Bhagwan Ki Katha In Hindi

Bhakt Aur Bhagwan Ki Katha In Hindi

Bhakt Aur Bhagwan Ki Katha In Hindi

!!Jai shree krishna!!

बहूत सुंदर कथा

☺मेरा वृन्दावन☺

एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया
और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से
बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और
सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की
माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी
को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का
नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका.
उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना
आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और
बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ
गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला
राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं
मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने
मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला
मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला
उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर
पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख
ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से
माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा
दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला
उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया
कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर
वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा
को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह
सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं
तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा- महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से
से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा
है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा-
पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के
समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या
काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया.अब पुजारी रोकर
बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके
सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली
माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो
गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का
सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे
नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो
कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते
रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज
प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट
हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग
दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी
चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे
ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून
कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा
मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे
लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं.
उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद
करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.
यह कहानी किसी पुराण से तो नहीं है लेकिन इसका मर्म
किसी पुराण की कथा से कम भी नहीं है. कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण
होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।।

श्री वृन्दावन बांके बिहारी लाल की जय हो ||

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Yamraj – Chitragupta Funny Inspirational Story

Yamraj – Chitragupta Funny Inspirational Story

Yamraj - Chitragupta Funny Inspirational Story

Short & Funny Hindi Inspirational Story

*इतना ज्ञान, तो फिर क्यों नहीं हैं*
*ख़ुश धरती पर लोग*

एक दिन यमराज और चित्रगुप्त आपस में बात कर रहे थे। अचानक से यमराज ने चित्रगुप्त से पूछा,

“चित्रगुप्त, एक बात बताओ, *वाट्सअप* और *फ़ेस्बुक* पर होने वाले ज्ञान के आदान प्रदान को देखकर तो लगता है कि मनुष्यलोक में सभी लोग एकदम मज़े में होंगे और स्वर्ग का आनन्द ले रहे होंगे पर उनके चेहरों को देखकर एेसा मालूम तो नहीं पडता । क्या प्रोब्लम हो सकता
है ? “

चित्रगुप्त हल्के से मुस्कुराये और बोले, “महाराज, कल मैंने आपको आपके पेट दर्द के लिए आयुर्वेद का एक बेहतरीन इलाज वहाटसअप पर भेजा था, वो आपको कैसा लगा ?”

यमराज ने बड़े ही उत्साह के साथ तुरंत उत्तर दिया और बोले, “जरूर ही बहुत अच्छा होगा चित्रगुप्त क्योंकि मैंने तुरंत उसे मेरे सारे ग्रुप्स पर फॉरवर्ड कर दिया था । और तुरंत बहुत सारे लाइकस भी आ गए थे । और तो और, अब वही मैसेज मुझे वापस भी आने लगे है ।”

यमराज का उत्तर सुनकर चित्रगुप्त बोले, “वो तो ठीक है महाराज, – पर क्या आपने वो नुस्खा आजमाया ?”

यमराज बड़े ही उदास होकर बोले – “नहीं चित्रगुप्त, मैं उस नुस्ख़े को नहीं आज़मा पाया क्योंकि मैं पूरा समय उस नुस्ख़े को सभी लोगों को फ़ॉर्वर्ड करने में व्यस्त रहा ।”

इसपर चित्रगुप्त ने उत्तर दिया, “तो महाराज, बस यही प्रोब्लम है । *ज्ञान तो बहुत है पर जीवन मैं उतारने का समय किसी के पास नहीं ।*

बस सब फ़ॉर्वर्ड करने में लगे रहते है ।

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Story Of Helpless Man In Hindi

Main Ek Seedha Sadha Insan Hu
Par Main Apni Baayi Aankh Se Pareshan Hu

Jab Bhi Main Kisi Ko Dekhta Hu Meri Baayi Aankh Chal Jati Hai
Bachpan Ka Ek Kissa Suniye, Ye Baat Hai Bachpan Ki

Meri Class Me Padhti Thi Rekha Maine Usko Dekha
Meri Baayi Aankh Chal Gayee
Wo Uchhal Gayee Machal Gayee, Aur Kaksha Se Nikal Gayee

Principal Madam Ka Bulawa Aaya
Unhone Mujhe Lamba Chowra Bhashan Pilaya

Isse Pehle Ki Wo Mujhe Aur Kuch Keh Paati
Meri Baayi Aakh Chal Gayee
Unhone Mujhe Vidyalaya Se Nikala
Phir Mai Sidha Andaman Aa Pahucha

Andaman Me Meri Shadi Ki Baat Chali
Jaise Hi Maine Sasu Ji Ko Dekha
Meri Baayi Aankh Chal Gayee
Sasur Ji Kehne Lage Bete Shadi Karne Aaye Ho Meri Beti Se Aur Line Marte Ho Meri Patni Ko
Tabse Main Kunwara Tha

Shayad Bhagvan Ko Mujh Par Taras Aaya
Unhone Mujhe Shivani Se Milaya
Maine Use Apna Haal Bataya
Tab Jake Usne Mujhe Apnaya

Ab Main Shadi Shuda Hoon
Aur Ek Natkhat Chulbuli Beti Ka Baap Hoon

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