Random Posts
Cards:  Holi Special | Suvichars | Funny Shayari | Dosti | Friendship | Miss You | Inspirational | FB Covers | Good Morning | Good Night  Text: Top 50 Shayari's | Heart Touching Shayari's | More Shayari's | Emotional Messages | Love Messages | Love StoriesTouching Stories

Advertisement

1 2 3 4 5 6 7 8 9 ... 2118

Nice Story On Son & Dad In Hindi

father-and-son-lovesove

पिता : ओ बेवकूफ़।
मैंने तुमको गीता दी थी पढ़ने के लिए
क्या तुमने गीता पढ़ी ? कुछ। दिमाग मे घुसा।
पुत्र : हाँ पिताजी पढ़ ली।
और
अब
आप

मरने के लिए तैयार हो जाओ ( कनपटी पर तमंचारख देता है ) ।
पिता : बेटा ये क्या कर रहे हो ? मैं तुम्हारा बाप हूँ ।
पुत्र: पिताजी , ना कोई किसी का बाप है और ना कोई किसी का बेटा । ऐसा गीता में लिखा है ।
पिता : बेटा मैं मर जाऊंगा ।
पुत्र : पिताजी शरीर मरता है ।
आत्मा कभी नही मरती!
आत्मा अजर है,
अमर है ।
पिता : बेटा मजाक मत करो गोली चल जाएगी और मुझको दर्द से तड़पाकर मार देगी ।
पुत्र : क्यों व्यर्थ चिंता करते हो ? किससे तुम डरते हो ।
गीता में लिखा है-
नैनं छिन्दन्ति शस्त्राणि,
नैनं दहति पावकः
आत्मा को ना पानी भिगो सकता है
और
ना ही तलवार काट सकती,
ना ही आग जला सकती ।
किसलिए डरते हो तुम ।
पिता : बेटा! अपने भाई बहनों के बारे में तो सोच, अपनी माता के बारे में भी सोच ।
पुत्र : इस दुनिया में कोई
किसी का नही होता ।
संसार के सारे रिश्ते स्वार्थों पर टिके है ।
ये भी गीता में ही लिखा है ।
पिता : बेटा मुझको मारने से तुझे क्या मिलेगा ?
बेटा : अगर इस धर्मयुद्ध में आप मारे गए तो आपको स्वर्ग प्राप्ति होगी ।
मुझको आपकी संपत्ति प्राप्त
होगी । अगर मर गया तो स्वर्ग प्राप्त होगा ।
पिता : बेटा ऐसा जुर्म मत कर ।
पुत्र : पिताजी आप चिंता ना करें।
जिस प्रकार आत्मा पुराने जर्जर शरीर को त्यागकर नया शरीर
धारण करती है, उसी प्रकार आप भी पुराने जर्जर शरीर
को त्यागकर नया शरीर धारण करने की तयारी करें ।
अलविदा ।
Moral-
कलयुग की औलादों को सतयुग, त्रेतायुग या द्वापर युग की शिक्षा नहीं दे !

Jab aankh khuli toh – A nice story

Mother-son-lovesove

जब आंख खुली तो अम्‍मा की
गोदी का एक सहारा था
उसका नन्‍हा सा आंचल मुझको
भूमण्‍डल से प्‍यारा था

उसके चेहरे की झलक देख
चेहरा फूलों सा खिलता था
उसके स्‍तन की एक बूंद से
मुझको जीवन मिलता था

हाथों से बालों को नोंचा
पैरों से खूब प्रहार किया
फिर भी उस मां ने पुचकारा
हमको जी भर के प्‍यार किया

मैं उसका राजा बेटा था
वो आंख का तारा कहती थी
मैं बनूं बुढापे में उसका
बस एक सहारा कहती थी

उंगली को पकड. चलाया था
पढने विद्यालय भेजा था
मेरी नादानी को भी निज
अन्‍तर में सदा सहेजा था

मेरे सारे प्रश्‍नों का वो
फौरन जवाब बन जाती थी
मेरी राहों के कांटे चुन
वो खुद गुलाब बन जाती थी

मैं बडा हुआ तो कॉलेज से
इक रोग प्‍यार का ले आया
जिस दिल में मां की मूरत थी
वो रामकली को दे आया

शादी की पति से बाप बना
अपने रिश्‍तों में झूल गया
अब करवाचौथ मनाता हूं
मां की ममता को भूल गया

हम भूल गये उसकी ममता
मेरे जीवन की थाती थी
हम भूल गये अपना जीवन
वो अमृत वाली छाती थी

हम भूल गये वो खुद भूखी
रह करके हमें खिलाती थी
हमको सूखा बिस्‍तर देकर
खुद गीले में सो जाती थी

हम भूल गये उसने ही
होठों को भाषा सिखलायी थी
मेरी नीदों के लिए रात भर
उसने लोरी गायी थी

हम भूल गये हर गलती पर
उसने डांटा समझाया था
बच जाउं बुरी नजर से
काला टीका सदा लगाया था

हम बडे हुए तो ममता वाले
सारे बन्‍धन तोड. आए
बंगले में कुत्‍ते पाल लिए
मां को वृद्धाश्रम छोड आए

उसके सपनों का महल गिरा कर
कंकर-कंकर बीन लिए
खुदग़र्जी में उसके सुहाग के
आभूषण तक छीन लिए

हम मां को घर के बंटवारे की
अभिलाषा तक ले आए
उसको पावन मंदिर से
गाली की भाषा तक ले आए

मां की ममता को देख मौत भी
आगे से हट जाती है
गर मां अपमानित होती
धरती की छाती फट जाती है

घर को पूरा जीवन देकर
बेचारी मां क्‍या पाती है
रूखा सूखा खा लेती है
पानी पीकर सो जाती है

जो मां जैसी देवी घर के
मंदिर में नहीं रख सकते हैं
वो लाखों पुण्‍य भले कर लें
इंसान नहीं बन सकते हैं

मां जिसको भी जल दे दे
वो पौधा संदल बन जाता है
मां के चरणों को छूकर पानी
गंगाजल बन जाता है

मां के आंचल ने युगों-युगों से
भगवानों को पाला है
मां के चरणों में जन्‍नत है
गिरिजाघर और शिवाला है

हिमगिरि जैसी उंचाई है
सागर जैसी गहराई है
दुनियां में जितनी खुशबू है
मां के आंचल से आई है

मां कबिरा की साखी जैसी
मां तुलसी की चौपाई है
मीराबाई की पदावली
खुसरो की अमर रूबाई है

मां आंगन की तुलसी जैसी
पावन बरगद की छाया है
मां वेद ऋचाओं की गरिमा
मां महाकाव्‍य की काया है

मां मानसरोवर ममता का
मां गोमुख की उंचाई है
मां परिवारों का संगम है
मां रिश्‍तों की गहराई है

मां हरी दूब है धरती की
मां केसर वाली क्‍यारी है
मां की उपमा केवल मां है
मां हर घर की फुलवारी है

सातों सुर नर्तन करते जब
कोई मां लोरी गाती है
मां जिस रोटी को छू लेती है
वो प्रसाद बन जाती है

मां हंसती है तो धरती का
ज़र्रा-ज़र्रा मुस्‍काता है
देखो तो दूर क्षितिज अंबर
धरती को शीश झुकाता है

माना मेरे घर की दीवारों में
चन्‍दा सी मूरत है
पर मेरे मन के मंदिर में
बस केवल मां की मूरत है

मां सरस्‍वती लक्ष्‍मी दुर्गा
अनुसूया मरियम सीता है
मां पावनता में रामचरित
मानस है भगवत गीता है

अम्‍मा तेरी हर बात मुझे
वरदान से बढकर लगती है
हे मां तेरी सूरत मुझको
भगवान से बढकर लगती है

सारे तीरथ के पुण्‍य जहां
मैं उन चरणों में लेटा हूं
जिनके कोई सन्‍तान नहीं
मैं उन मांओं का बेटा हूं

हर घर में मां की पूजा हो
ऐसा संकल्‍प उठाता हूं
मैं दुनियां की हर मां के
चरणों में ये शीश झुकाता हू

Information About Heart In Hindi

heart-in-sky-lovesove

दिल वालों से दिल की बात

जिस किसी के भी पास दिल.है उसे दिल की बीमारी होने की पूरी सम्भावना हो सकती है|
इसलिए दिल के विषय में हर दिल वाले को कुछ मूलभुत जानकारी होना आवश्यक है, जैसे कि दिल का काम करने का तरिका – हमारे जनम से पहले से मरने की घडी तक हमारा दिल सतत कार्य करता रहता है, यह कैसे सम्भव होता है ? हम कार्य करके थक जाते हैं तो आराम कर लेते हैं, लेकिन दिल कहे कि मैं थोडा सा आराम कर लूँ तो हमारा कार्य करना सदा के लिए बन्द हो जायेगा|

यह इसलिए सम्भव हो पाता है क्योंकि हमारा दिल सदैव अनुशासन के अनुसार ही कार्य करता है|

दिल 0.3 सेकंड सिकुडता (पम्प करता) है और 0.5 सेकंड आराम (रिलैक्स) करता है, फिर सिकुडता फिर आराम करता फिर . . . . यह सिलसिला जनम से पहले से मौत तक लगातार चलता ही रहता है| इस प्रकार 0.3+0.5=0.8 सेकण्ड में दिल की एक धडकन पूर्ण होती है अर्थात् 72 धडकन प्रती मिनट दिल की सामान्य गति कही जाती है|

आराम के समय अशुद्ध रक्त फेफडों में जाकर प्राण वायु के द्वारा 100% शुद्ध होता है|

दिल सारे दिन में करीब 7000 लिटर रक्त को पम्प करता है, जिसमें से 70% दिमाग को जाता है और 30% में बाकी शरीर कार्य करता है|

यदि जल्दबाजी के वा नकारात्मक भावनाओं के आधार पर सोचने/कार्य करने के कारण रक्त की मांग बढ जाती है तो जल्दी-जल्दी पम्प करना पडता है| ऐसे में पम्प का समय तो कम नहीं कर सकता तो आराम क समय कम कर देता है| आराम का समय कम होना माना रक्त का शुद्धिकरण अधुरा होना| अशुद्ध रक्त धमनियों में बहने से अशुद्ध तत्व धमनियों में जमते जाते हैं और धमनियां जो इलास्टिक होती हैं वह प्लास्टिक हो जाती हैं और यही बात दिल की बीमारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है|

उत्तेजक पदार्थों STIMULANTS के सेवन से दिमाग उत्तेजित होकर उसकी गति तेज होने से रक्त की मांग बढने से दिल की गति बढ जाती है| इसलिए उत्तेजक पदार्थों के सेवन की आदत से दिल की बीमारी वा दौरे के अवसर बढते ही हैं|

इसी प्रकार जल्दबाजी, गुस्सा, उदासी, बदले की भावना, अकेलापन, भावनत्मक द्रूष्टि से संवेदनशील EMOTIONALLY SENSITIVE होना . . . ये आदतें भी दिमाग की गति को बार बार बढाकर दिल की बीमारी व दौरे HEART ATTACK के अवसर बढाती है|

यह आदतें बदलना कोई दवाई. MEDICATION से सम्भव नहीं है, इसके लिए मन-बुद्धि की एक्सरसाईज अर्थात् राजयोग की ध्यान धारणा MEDITATION की आवश्यकता है| इसके कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं, और ही जीवन के सभी क्षेत्रों में निपुणता बढती है|

आपको अपने दिल से, परिवार जनों से प्रेम है तो मेडिटेशन सिखकर उसका नियमित अभ्यास करें और सबको करायें|

||| शुभ कामनायें |||

I am Happy – Anmol Vachan In Hindi

। खुश हूं ।a-beautiful_babe_farm_lovesove

“जिंदगी है छोटी,” हर पल में खुश हूं
“काम में खुश हूं,” आराम में खुश हू

“आज पनीर नहीं,” दाल में ही खुश हूं
“आज गाड़ी नहीं,” पैदल ही खुश हूं

“दोस्तों का साथ नहीं,” अकेला ही खुश हूं
“आज कोई नाराज है,” उसके इस अंदाज से ही खुश हूं

“जिस को देख नहीं सकता,” उसकी आवाज से ही खुश हूं
“जिसको पा नहीं सकता,” उसको सोच कर ही खुश हूं

“बीता हुआ कल जा चुका है,” उसकी मीठी याद में ही खुश हूं
“आने वाले कल का पता नहीं,” इंतजार में ही खुश हूं

“हंसता हुआ बीत रहा है पल,” आज में ही खुश हूं
“जिंदगी है छोटी,” हर पल में खुश हूं

“अगर दिल को छुआ, तो जवाब देना”
“वरना बिना जवाब के भी खुश हूं।”
आप भी खुश रहें और खुशियाँ बांटें ।

1 2 3 4 5 6 7 8 9 ... 2118


Advertisement

~Never fall in love Always Rise in love, Never say We fell in love, Always say We feel the love”~